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आरती गजबदन विनायक की

विनायक आरती

आरती गजबदन विनायक की । सुर-मुनि-पूजित विघ्ननायक की ॥ एकदंत शशिभाल गजानन । विघ्नविनाशक शुभ गुण कानन ॥ शिवसुत वन्द्यमान-चतुरानन । दुःखविनाशक सुखदायक की ॥ ऋद्धि-सिद्धि स्वामी समर्थ अति । विमल बुद्धि दाता सुविमल मति ॥ अघ-वन-दहन अमल अविगत गति । विद्या-विनय-विभव-दायक की ॥ पिंगलनयन विशाल शुण्डधर । धूम्रवर्ण शुचि वज्रांकुश-कर ॥ लम्बोदर बाधा-विपत्ति-हर । सुर-वन्दित सब लायक की ॥ गणपति की सेवा मंगल मेवा । सेवा से सब विघ्न टरें ॥ तीन लोक तैंतीस देवता । द्वार खड़े सब अर्ज करें ॥ रिद्धि-सिद्धि दक्षिण वाम विराजें । अरु आनन्द सों चंवर करें ॥ धूप दीप और लिए आरती । भक्त खड़े जयकार करें ॥ गणपति की सेवा मंगल मेवा । सेवा से सब विघ्न टरें ॥