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जयति जयति जग-निवास

भगवान शंकरको आरती

जयति जयति जग-निवास, जगत-कारण, सुखरासि. अगँम, अगोचर, अलख, अनादि, अविनाशी॥ शीश गंग, ललाट चन्द्र, गल मुण्डन की माला. सर्प-हार, बाघम्बर-धर, डमरु-त्रिशूल-भाला॥ भस्म-अंग, गिरीश, ईश, पशुपति, गिरिजा-पति. ब्रह्मा, विष्णु, महेष, शेष निज महिमा गावती॥ दीन-बन्धु, दयाल, कृपाल, जय जय शिव शङ्कर. पाहि पाहि शरणागत, जन-रञ्जन, शुभङ्कर॥