श्री राम रघुपति आरती
रघुपति करुना निधान आरती
बन्दौं रघुपति करुना निधान। जाते छूटै भव-भेद ग्यान॥
रघुबन्स-कुमुद-सुखप्रद निसेस। सेवत पद-पन्कज अज-महेस॥
निज भक्त-हृदय पाथोज-भृन्ग। लावन्यबपुष अगनित अनन्ग॥
अति प्रबल मोह-तम-मारतण्ड। अग्यान-गहन- पावक-प्रचण्ड॥
अभिमान-सिन्धु-कुम्भज उदार। सुररन्जन, भन्जन भूमिभार॥
रागादि- सर्पगन पन्नगारि। रघुपति करुना निधान॥







