भगवान श्रीकृष्ण
साझा गर्नुहोस्
लीलापुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्णका १०८ पवित्र नामहरू (अष्टोत्तर शतनामावली)

कुन समयमा पढ्ने?
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, गोवर्धन पूजा, गीता जयन्ती, र एकादशीको दिन।
कसरी पाठ गर्ने?
विष्णुका अवतार भएकाले श्रीकृष्णलाई पनि तुलसी दल अति प्रिय छ। १०८ नाम पढ्दै तुलसी, पहेँलो फूल र अक्षता चढाउने। पूजाको अन्त्यमा माखन र मिश्रीको भोग लगाउने विधान छ।
१०८ नामावली
- 1.ॐ श्रीकृष्णाय नमः।जो श्यामवर्ण वाले हैं
- 2.ॐ कमलानाथाय नमः।जो देवी लक्ष्मी के पति हैं
- 3.ॐ वासुदेवाय नमः।जो वसुदेव जी के पुत्र हैं
- 4.ॐ सनातनाय नमः।जो तीनों कालों में विद्यमान रहने वाले हैं
- 5.ॐ वसुदेवात्मजाय नमः।जो वसुदेवजी के पुत्र हैं
- 6.ॐ पुण्याय नमः।जो परम पुण्यशाली हैं
- 7.ॐ लीलामानुषविग्रहाय नमः।जिन्होंने अपनी लीलाओं को दिखाने के लिये मनुष्य रूप में अवतार लिया है
- 8.ॐ श्रीवत्सकौस्तुभधराय नमः।जो श्रीवत्स और कौस्तुभ मणि को धारण करते हैं
- 9.ॐ यशोदावत्सलाय नमः।जो माता यशोदा के अत्यन्त प्रिय पुत्र हैं
- 10.ॐ हरये नमः।जो प्रकृति के स्वामी हैं
- 11.ॐ चतुर्भुजात्तचक्रासिगदाशङ्खाम्बुजायुधाय नमः।जो चक्र, तलवार, गदा, शंख आदि अस्त्र धारण करने वाले चतुर्भुजी हैं
- 12.ॐ देवकीनन्दनाय नमः।जो माता देवकी के पुत्र हैं
- 13.ॐ श्रीशाय नमः।जो देवी लक्ष्मी के पति हैं
- 14.ॐ नन्दगोपप्रियात्मजाय नमः।जो महाराज नन्द के प्रिय पुत्र हैं
- 15.ॐ यमुनावेगसंहारिणे नमः।जो यमुना नदी के वेग को हर लेने वाले हैं
- 16.ॐ बलभद्रप्रियानुजाय नमः।जो भगवान बलराम के प्रिय अनुज हैं
- 17.ॐ पूतनाजीवितहराय नमः।जो राक्षसी पूतना के प्राणों को हर लेने वाले हैं
- 18.ॐ शकटासुरभञ्जनाय नमः।जो शकटासुर को नष्ट कर देने वाले हैं
- 19.ॐ नन्दव्रजजनानन्दिने नमः।जो महाराज नन्द और ब्रजवासियों को आनन्द देने वाले हैं
- 20.ॐ सच्चिदानन्दविग्रहाय नमः।जो शाश्वत, अजर-अमर और अविनाशी स्वरूप हैं
- 21.ॐ नवनीतविलिप्ताङ्गाय नमः।जिनका शरीर मक्खन से सना हुआ है
- 22.ॐ नवनीतनटाय नमः।जो मक्खन के लिये नृत्य करते हैं
- 23.ॐ अनघाय नमः।जो पापों से रहित हैं
- 24.ॐ नवनीतनवाहाराय नमः।जो मक्खन चुराने के नये-नये तरीके ढूँढते हैं
- 25.ॐ मुचुकुन्दप्रसादकाय नमः।जो राजा मुचुकुन्द को अनुग्रह प्रदान करने वाले हैं
- 26.ॐ षोडशस्त्रीसहस्रेशाय नमः।जो सोलह हजार स्त्रियों के स्वामी हैं
- 27.ॐ त्रिभङ्गिने नमः।जो त्रिभङ्गी अर्थात् जिनका सुन्दर रूप तीन स्थानों से टेढ़ा है
- 28.ॐ मधुराकृतये नमः।जिनका स्वरूप अत्यन्त आकर्षक है
- 29.ॐ शुकवागमृताब्धीन्दवे नमः।जो शुक के कथनानुसार अमृत के महासागर हैं
- 30.ॐ गोविन्दाय नमः।जो गायों को सुख प्रदान करने वाले हैं
- 31.ॐ योगिनां पतये नमः।जो योगियों के भी योगी अर्थात् स्वामी हैं
- 32.ॐ वत्सवाटचराय नमः।जो बछड़ों को चराते हैं
- 33.ॐ अनन्ताय नमः।जिनका कोई अन्त नहीं है
- 34.ॐ धेनुकासुरभञ्जनाय नमः।जो गधे के स्वरूप वाले धेनुकासुर को मारने वाले हैं
- 35.ॐ तृणीकृततृणावर्ताय नमः।जो तृणावर्त को घास के समान तुच्छ मानकर मारने वाले हैं
- 36.ॐ यमलार्जुनभञ्जनाय नमः।जो यमलार्जुन नामक अर्जुन के जुड़वा वृक्षों को तोड़ने वाले हैं
- 37.ॐ उत्तालतालभेत्रे नमः।जो बड़े ताल वृक्षों को नष्ट कर देने वाले हैं
- 38.ॐ तमालश्यामलाकृतये नमः।जो तमाल वृक्ष के समान कृष्ण वर्ण वाले हैं
- 39.ॐ गोपगोपीश्वराय नमः।जो गोपों और गोपियों के स्वामी हैं
- 40.ॐ योगिने नमः।जो परम योगी हैं
- 41.ॐ कोटिसूर्यसमप्रभाय नमः।जो करोड़ों सूर्य के समान आभा वाले हैं
- 42.ॐ इलापतये नमः।जो ज्ञान के स्वामी हैं
- 43.ॐ परस्मै ज्योतिषे नमः।जिनके पास परम तेज है
- 44.ॐ यादवेन्द्राय नमः।जो यादव कुल के स्वामी हैं
- 45.ॐ यदूद्वहाय नमः।जो यदुओं के नेता हैं
- 46.ॐ वनमालीने नमः।जो वनपुष्पों की मालाओं को धारण करते हैं
- 47.ॐ पीतवाससे नमः।जो पीले वस्त्र धारण करते हैं
- 48.ॐ पारिजातापहारकाय नमः।जो पारिजात वृक्ष को उठाकर ले जाने वाले हैं
- 49.ॐ गोवर्धनाचलोद्धर्त्रे नमः।जो गोवर्धन पर्वत को उठाने वाले हैं
- 50.ॐ गोपालाय नमः।जो गायों के संरक्षक हैं
- 51.ॐ सर्वपालकाय नमः।जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के पालनहार हैं
- 52.ॐ अजाय नमः।जो प्रभु अजन्मे हैं
- 53.ॐ निरञ्जनाय नमः।जो निष्कलंक हैं
- 54.ॐ कामजनकाय नमः।जो मन में सांसारिक इच्छायें उत्पन्न करते हैं
- 55.ॐ कञ्जलोचनाय नमः।जो कमल के समान नेत्र वाले हैं
- 56.ॐ मधुघ्ने नमः।जो मधु नामक दैत्य का वध करने वाले हैं
- 57.ॐ मथुरानाथाय नमः।जो मथुरा नगरी के स्वामी हैं
- 58.ॐ द्वारकानायकाय नमः।जो द्वारका नगरी के अधिपति हैं
- 59.ॐ बलिने नमः।जो अत्यन्त शक्तिशाली हैं
- 60.ॐ वृन्दावनान्तसञ्चारिणे नमः।जो वृन्दावन में विचरण करने वाले हैं
- 61.ॐ तुलसीदामभूषणाय नमः।जो तुलसी की माला धारण करने वाले हैं
- 62.ॐ स्यमन्तकमणेर्हर्त्रे नमः।जो स्यमन्तक मणि का हरण करने वाले हैं
- 63.ॐ नरनारायणात्मकाय नमः।जो नर और नारायण दोनों स्वरूपों में हैं
- 64.ॐ कुब्जाकृष्णाम्बरधराय नमः।जो कुब्जा नामक कूबड़ी के हाथों द्वारा चन्दन लगवाने वाले हैं
- 65.ॐ मायिने नमः।जो अत्यन्त मायावी हैं
- 66.ॐ परमपूरुषाय नमः।जो सर्वोच्च हैं
- 67.ॐ मुष्टिकासुरचाणूरमल्लयुद्धविशारदाय नमः।जो मुष्टिका और चाणूर नामक पहलवानों से कुशलता से युद्ध करने वाले हैं
- 68.ॐ संसारवैरिणे नमः।जो भौतिकी सत्ता के शत्रु हैं
- 69.ॐ कंसारये नमः।जो राजा कंस के शत्रु हैं
- 70.ॐ मुरारये नमः।जो मुरा नामक राक्षस का वध करने वाले हैं
- 71.ॐ नरकान्तकाय नमः।जो नरका नामक असुर का संहार करने वाले हैं
- 72.ॐ अनादिब्रह्मचारिणे नमः।जो शाश्वत ब्रह्मचारी है
- 73.ॐ कृष्णाव्यसनकर्षकाय नमः।जो द्रौपदी को संकटकाल में बचाने वाले हैं
- 74.ॐ शिशुपालशिरश्छेत्रे नमः।जो शिशुपाल का सिर धड़ से अलग करने वाले हैं
- 75.ॐ दुर्योधनकुलान्तकाय नमः।जो दुर्योधन के राजवंश के विनाशक हैं
- 76.ॐ विदुराक्रूरवरदाय नमः।जो विदुर और अक्रूर को आशीर्वाद देने वाले हैं
- 77.ॐ विश्वरूपप्रदर्शकाय नमः।जो विश्वस्वरूप को दिखाने वाले हैं
- 78.ॐ सत्यवाचे नमः।जो सत्य बोलने वाले हैं
- 79.ॐ सत्यसङ्कल्पाय नमः।जो सच्चे संकल्प के स्वामी हैं
- 80.ॐ सत्यभामारताय नमः।जो सत्यभामा के प्रेमी हैं
- 81.ॐ जयिने नमः।जो हमेशा विजयी होने वाले हैं
- 82.ॐ सुभद्रापूर्वजाय नमः।जो सुभद्रा के भाई हैं
- 83.ॐ विष्णवे नमः।जो परम परमेश्वर हैं
- 84.ॐ भीष्ममुक्तिप्रदायकाय नमः।जो भीष्म को मोक्ष प्रदान करने वाले हैं
- 85.ॐ जगद्गुरवे नमः।जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के गुरु हैं
- 86.ॐ जगन्नाथाय नमः।जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के स्वामी हैं
- 87.ॐ वेणुनाद विशारदाय नमः।बाँसुरी वादन में दक्ष हैं
- 88.ॐ वृषभासुरविध्वंसिने नमः।जो वृषभासुर के संहारक हैं
- 89.ॐ बाणासुरकरान्तकाय नमः।जो बाणासुर का वध करने वाले हैं
- 90.ॐ युधिष्ठिरप्रतिष्ठात्रे नमः।जो युधिष्ठिर को राजा बनाने वाले हैं
- 91.ॐ बर्हिबर्हावतंसकाय नमः।जो मोर पंख का शृंगार करते हैं
- 92.ॐ पार्थसारथये नमः।जो अर्जुन के रथ के चालक हैं
- 93.ॐ अव्यक्ताय नमः।जो रूप से रहित हैं
- 94.ॐ गीतामृतमहोदधये नमः।जो भगवद्गीता के अमृत से युक्त महासागर हैं
- 95.ॐ कालीयफणिमाणिक्यरञ्जितश्रीपदाम्बुजाय नमः।जिनके चरण कमलों में कालिया नाग के फन की मणियाँ सुशोभित हैं
- 96.ॐ दामोदराय नमः।जिन्हें माता यशोदा ओखल से बाँध नहीं पायी थीं
- 97.ॐ यज्ञभोक्त्रे नमः।जो यज्ञ में प्रदत्त आहुति को ग्रहण करते हैं
- 98.ॐ दानवेन्द्रविनाशकाय नमः।जो असुरों के स्वामी का नाश करने वाले हैं
- 99.ॐ नारायणाय नमः।जो भक्तों के हृदय में रहने वाले हैं
- 100.ॐ परब्रह्मणे नमः।जो पराशक्ति परब्रह्म परमात्मा हैं
- 101.ॐ पन्नगाशनवाहनाय नमः।गरुड़ जिनकी सवारी है
- 102.ॐ जलक्रीडासमासक्तगोपीवस्त्रापहाराकाय नमः।जो यमुना नदी में खेलते समय गोपियों के कपड़े छिपा देते हैं
- 103.ॐ पुण्यश्लोकाय नमः।जिनकी स्तुति पुण्य प्रदान करती है
- 104.ॐ तीर्थकराय नमः।जो तीर्थ स्थानों के निर्माता हैं
- 105.ॐ वेदवेद्याय नमः।जो वेदों से जानने योग्य हैं
- 106.ॐ दयानिधये नमः।जो अगाध करुणा वाले हैं
- 107.ॐ सर्वतीर्थात्मकाय नमः।जो सभी तीर्थस्थलों के उद्गम स्थान हैं
- 108.ॐ सर्वग्रहरूपिणे नमः।जो सम्पूर्ण हैं
- 109.ॐ परात्पराय नमः।जो पराशक्ति परब्रह्म परमात्मा हैं
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